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बस ड्राइवर की बेटी बनी ISRO में साइंटिस्ट, खुद उठाती थी अपनी पढ़ाई का खर्चा

आज की कहानी है एक मिडल क्लास घर की लड़की की सफलता की कहानी, जिसकी कामयाबी ने उसके जैसी परिस्थितियों में रह रही कई लड़कियों को हिम्मत दी है और अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा कर दिखाने का उनको जज्बा प्रदान किया है। तो आइए देखते हैं क्या है आज की ये सफलता की कहानी जिसकी हम बात कर रहे हैं।

आज बात हो रही है मध्य प्रदेश की एक छोटी सी जगह विदिशा से आने वाली एक लड़की की जिनका नाम है सना अली जिनका चयन हमारे भारत देश की सर्वस्रेस्ट रिसर्च सेंटर में से एक इसरो में हुआ है। इनको isro में एक टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर चयनित किया गया है, जो इनके लिए काफी गर्व की बात है।

इनके इसरो में चयन होने के बाद इनको सभी तरफ से काफी बधाई के मैसेज आ रहे हैं और यहां तक कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी उनको कई सारे बधाई के संदेश आ रहे हैं और इनको सम्मानित करने की बातें भी हर तरफ हो रही है। इनके आस पड़ोस में भी इस खबर के आने के बाद काफी खुशी का माहौल है।

इनकी सफलता की कहानी भी बड़ी प्रेरणा दायक है। इनके पिता एक बस ड्राइवर का काम करते हैं जिससे किसी तरह इनका घर का खर्चा चलता है, और जहां तक इनकी पढ़ाई की बात है तो वो इनको खुद ही करना पड़ता था। ये खुद ही बच्चों को दिन भर ट्यूशन पढ़ा के अपने खर्चे चलाती थी और रात में ये खुद की पढ़ाई करती थी और आज इनकी मेहनत रंग ला चुकी है।

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